वास्तु ज्ञान इंजन
Vastu Knowledge Engine
Complete Vastu Shastra guide with House Plan Analyzer, interactive diagrams, room-wise guidelines, direction compass, mandala grid, search engine — all based on Brihat Samhita, Mayamatam, Manasara, Vishvakarma Prakash, and Samarangana Sutradhara.
206 entries indexed from Vedic texts
🏠 वास्तु गृह विश्लेषक
House Plan Analyzer — Free Vastu Score
Place rooms on the directional grid or choose a preset floor plan. Get instant Vastu score with detailed analysis, mantras, yantras, crystals, and Feng Shui comparison.
🏗️ नक्शा चुनें / Choose a Floor Plan:
🗺️ वास्तु ज़ोन मैप
समग्र वास्तु अनुपालन स्कोर
🏆 उत्कृष्ट वास्तु — दैवीय सामंजस्य!
Excellent Vastu — Divine Harmony!
🔥 पंच तत्व संतुलन
Vastu requires all 5 elements in harmony. Imbalance causes specific problems. वास्तु में पाँचों तत्वों का संतुलन आवश्यक। असंतुलन विशिष्ट समस्याएँ उत्पन्न करता है।
📋 विस्तृत कक्ष विश्लेषण
अतिथि कक्ष वायव्य में — उत्तम! सही वास्तु स्थान। वायव्य — अतिथि ज़्यादा नहीं रुकते। पश्चिम विकल्प। नैऋत्य में कभी नहीं (वे हावी हो जाएँगे)।
बैठक कक्ष उत्तर में — उत्तम! सही वास्तु स्थान। उत्तर/पूर्व सकारात्मक ऊर्जा आकर्षित करता है। भारी फर्नीचर कमरे के दक्षिण-पश्चिम कोने में।
पूजा कक्ष ईशान में — उत्तम! सही वास्तु स्थान। ईशान (ईशान्य) सर्वाधिक पवित्र। पूर्व/उत्तर मुख होकर पूजा करें। देवता का मुख पश्चिम/दक्षिण।
अध्ययन कक्ष पश्चिम में — उत्तम! सही वास्तु स्थान। पश्चिम या उत्तर। पूर्व/उत्तर मुख होकर पढ़ें। पुस्तक अलमारी पूर्व/उत्तर दीवार पर।
ब्रह्मस्थान (खुला केंद्र) ब्रह्मस्थान में — उत्तम! सही वास्तु स्थान। केंद्र अवश्य खुला रहे — कोई स्तंभ, दीवार, शौचालय, रसोई या भारी वस्तु नहीं। यह ब्रह्मांडीय नाभि है।
मुख्य द्वार पूर्व में — उत्तम! सही वास्तु स्थान। उत्तर/पूर्व द्वार समृद्धि लाता है। ईशान सर्वोत्तम। द्वार अंदर की ओर, दक्षिणावर्त खुले।
मुख्य शयनकक्ष नैऋत्य में — उत्तम! सही वास्तु स्थान। नैऋत्य स्थिरता और अधिकार देता है। दक्षिण/पूर्व दिशा में सिर रखकर सोएँ। उत्तर में कभी नहीं।
सीढ़ियाँ दक्षिण में — उत्तम! सही वास्तु स्थान। नैऋत्य सर्वोत्तम। दक्षिणावर्त चढ़ें। विषम संख्या (3 से भाग नहीं)। पूजा कक्ष के नीचे कभी नहीं।
रसोईघर आग्नेय में — उत्तम! सही वास्तु स्थान। अग्निकोण (दक्षिण-पूर्व) सर्वोत्तम। पूर्व मुख होकर पकाएँ। चूल्हा रसोई के दक्षिण-पूर्व कोने में।
🌍 विश्व वास्तु ज्ञान
How Vastu Shastra compares with other global architectural sciences.
Uses Ba Gua (8 trigrams), Chi flow, Yin-Yang balance. Similar to Vastu in directional importance but uses compass school (Luo Pan) vs Vastu's fixed grid. Both: center is sacred, clutter blocks energy.
Embraces imperfection, simplicity, natural materials. Kanso (簡素) = simplicity in design. Aligns with Vastu's emphasis on natural materials and open Brahmasthan (ma/間 — negative space).
Golden Ratio (φ = 1.618), Fibonacci sequence in temples. Pyramids aligned to cardinal directions. Vastu's Ayadi Shadvarga calculations parallel Pythagorean ratios for ideal proportions.
Vitruvius' "De Architectura" — firmitas (strength), utilitas (utility), venustas (beauty). Parallel to Vastu's Dridha (strength), Sukha (comfort), Chitra (beauty) principles.
Earth energy lines (ley lines), geopathic stress zones. Modern building biology studies confirm: underground water, geological faults affect health — Vastu's Dakargala (water divination) chapter addresses this.
Qibla direction (Kaaba), geometric patterns (Arabesque), courtyard-centric design. Like Vastu, emphasizes: central open space, directional alignment, geometric harmony, water features.
💡 मूल वास्तु सिद्धांत
📖 Sources: Brihat Samhita (Varahamihira, 6th CE) • Mayamatam (5th-7th CE) • Manasara Shilpa Shastra
Vishvakarma Prakash • Samarangana Sutradhara (King Bhoja, 11th CE) • Kashyapa Shilpa Shastra
☯️ Cross-referenced with: Feng Shui Ba Gua • Japanese Kanso • Sacred Geometry • Vitruvian Principles
📋 कक्ष-वार वास्तु नियम
Room-wise Vastu Guidelines — Click to Expand
📐 वास्तु आरेख
Interactive Vastu Diagrams — Click to View
✅ क्या करें ❌ क्या न करें
Essential Vastu Dos & Don'ts
✅ करें
- ✓उत्तर-पूर्व कोने को स्वच्छ, खुला और संपत्ति के सबसे निचले स्तर पर रखें।
- ✓दक्षिण-पश्चिम कोने को भारी, ठोस और सबसे ऊँचे स्तर पर रखें।
- ✓ब्रह्मस्थान (केंद्र) को खंभों, दीवारों या भारी वस्तुओं से मुक्त रखें।
- ✓सुनिश्चित करें कि ढलान दक्षिण-पश्चिम (ऊँचा) से उत्तर-पूर्व (नीचा) की ओर हो।
- ✓अधिकतम सकारात्मकता के लिए मुख्य प्रवेश द्वार उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व में रखें।
- ✓पूर्व से अधिकतम सूर्यप्रकाश आने दें — पूर्व दिशा की खिड़कियाँ बड़ी रखें।
- ✓बगीचे या बालकनी के उत्तर-पूर्व में तुलसी लगाएँ।
- ✓प्रवेश द्वार पर शुभ चिह्न (ॐ, स्वस्तिक, तोरण, कलश) लगाएँ।
- ✓घर को अच्छी तरह रोशन रखें, विशेषकर उत्तर-पूर्व कोना।
- ✓टपकते नलों की तुरंत मरम्मत करें — टपकता पानी धन के क्षय का प्रतीक है।
- ✓सभी दरवाज़ों और कब्ज़ों को ठीक रखें — चरमराते दरवाज़े नकारात्मकता आमंत्रित करते हैं।
- ✓सीढ़ियों में विषम संख्या में सीढ़ियाँ रखें (5, 7, 9, 11, 15, 17, 19, 21)।
❌ न करें
- ✗उत्तर-पूर्व कोने को शौचालय, भारी संरचनाओं या भंडारण से अवरुद्ध न करें।
- ✗किसी भी शयनकक्ष में बिस्तर की ओर मुख किए हुए दर्पण न रखें।
- ✗घर में टूटी घड़ियाँ, दर्पण या दरार वाली वस्तुएँ न रखें।
- ✗घर के अंदर काँटेदार पौधे (कैक्टस, प्रवेश द्वार के पास बोगेनविलिया) न लगाएँ।
- ✗मुख्य प्रवेश द्वार पर गहरा/काला रंग न करें।
- ✗मुख्य प्रवेश द्वार दक्षिण-पश्चिम में न रखें।
- ✗उत्तर दिशा की ओर सिर करके न सोएँ (चुंबकीय क्षेत्र में व्यवधान)।
- ✗रसोई में दक्षिण की ओर मुख करके खाना न पकाएँ।
- ✗रसोई या पूजा कक्ष से सटा हुआ शौचालय न बनाएँ।
- ✗ब्रह्मस्थान (घर के केंद्र) में शौचालय या रसोई न बनाएँ।
- ✗प्रवेश द्वार की ओर इशारा करती बंद गली न हो (वीथि शूल / टी-जंक्शन)।
- ✗दक्षिण-पश्चिम को नीचा या खुला न छोड़ें जबकि उत्तर-पूर्व ऊँचा या अवरुद्ध हो।
🙏 वास्तु उपाय
Vastu Remedies by Category
Mirror-Based Remedies
- •अशुभ दिशा की ओर वाले शौचालय के दरवाज़े के बाहर दर्पण लगाएँ।
- •उत्तर दीवार पर दर्पण कुबेर ऊर्जा सक्रिय करता है और धन आकर्षित करता है।
- •उत्तर-पूर्व में अवतल दर्पण सकारात्मक ऊर्जा आकर्षित करते हैं।
- •टूटे या दरार वाले दर्पण कभी उपयोग न करें।
Color-Based Remedies
- •प्रत्येक दिशा के लिए वास्तु-अनुकूल रंगों में दीवारें रंगें।
- •उत्तर-पूर्व में पीला या क्रीम रंग सकारात्मकता बढ़ाता है।
- •उत्तर में हरा रंग विकास को बढ़ावा देता है।
- •अग्नेय में लाल या नारंगी रंग अग्नि ऊर्जा को मजबूत करते हैं।
Plant-Based Remedies
- •तुलसी: उत्तर-पूर्व में रखें; नकारात्मकता दूर करती है, वायु शुद्ध करती है।
- •बैम्बू (लकी बैम्बू): धन आकर्षित करता है; पूर्व या अग्नेय में रखें।
- •मनी प्लांट: उत्तर या पूर्व में रखें; आर्थिक वृद्धि आकर्षित करता है।
- •नीम का पेड़: वायव्य के पास; नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करता है।
- •केले का पौधा: उत्तर-पूर्व में; अत्यंत शुभ।
- •घर के अंदर से सभी सूखे पौधे, सूखे फूल और काँटेदार पौधे हटाएँ।
Salt-Based Remedies
- •वास्तु दोष वाले कमरों के कोनों में समुद्री नमक रखें (साप्ताहिक बदलें)।
- •पोछा लगाते समय फर्श पर समुद्री नमक का पानी छिड़कें ताकि नकारात्मक ऊर्जा दूर हो।
- •अग्नेय कोने में नमक के पानी के गिलास में एक नींबू रखें।
Pyramid Remedies
- •वास्तु पिरामिड (ताँबा/क्रिस्टल) ऊर्जा प्रवाह को पुनर्निर्देशित और संतुलित करते हैं।
- •यदि ब्रह्मस्थान खुला न हो तो छत पर रखें।
- •खाना पकाने के क्षेत्र के पास ताँबे के पिरामिड अग्नि ऊर्जा संतुलित करते हैं।
- •ग्रिड में नौ पिरामिड प्रमुख ऊर्जा असंतुलन को ठीक करते हैं।
Crystal Remedies
- •उत्तर-पूर्व में स्फटिक सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है।
- •शयनकक्ष में जामुनिया (एमेथिस्ट) शांतिपूर्ण नींद को बढ़ावा देता है।
- •उत्तर में या कैश बॉक्स के पास सिट्रीन धन ऊर्जा बढ़ाता है।
Copper Strip/Wire Remedies
- •कमरे की परिधि के चारों ओर ताँबे का तार ऊर्जा प्रवाह को ठीक करता है।
- •मुख्य प्रवेश द्वार के पास ताँबे की पट्टियाँ नकारात्मक ऊर्जा दूर रखती हैं।
- •मुख्य द्वार पर ताँबे का स्वस्तिक या ॐ चिह्न।
Symbolic & Religious Remedies
- •मुख्य प्रवेश द्वार पर स्वस्तिक (सार्वभौमिक वास्तु सुधारक)।
- •उत्तर-पूर्व में या मुख्य द्वार पर ॐ चिह्न।
- •पूजा कक्ष या उत्तर दीवार पर श्री यंत्र (धन आकर्षक)।
- •सामान्य सुधार के लिए वास्तु दोष निवारण यंत्र।
- •प्रवेश द्वार पर दक्षिण की ओर मुख किए हनुमान चित्र (नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करता है)।
- •प्रवेश द्वार पर गणेश मूर्ति (बाधाएँ दूर करती है)।
- •शाम को कपूर जलाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
Light-Based Remedies
- •उत्तर-पूर्व कोने को हमेशा अच्छी तरह रोशन रखें।
- •अंधेरे गलियारों में तेज़ रोशनी का उपयोग करें।
- •रसोई के अग्नेय कोने में एक दीपक (दीया)।
- •स्थिरता के लिए दक्षिण-पश्चिम शयनकक्ष में नाइट लैंप।
Wind Chime Remedies
- •मुख्य प्रवेश द्वार पर धातु की विंड चाइम रुकी हुई ऊर्जा दूर करती हैं।
- •उत्तर-पूर्व में सिरेमिक विंड चाइम।
- •शयनकक्ष में विंड चाइम से बचें (नींद में बाधा डालती हैं)।
📜 प्रामाणिक वैदिक ग्रंथ
Authentic Source Texts (10 texts)
Mayamatam
मयमतम्
by Maya Danava | ~~500 pages
Brihat Samhita
बृहत् संहिता
by Varahamihira | ~~1000 pages
Manasara Shilpa Shastra
मानसार शिल्प शास्त्र
by South Indian School | ~~700 pages
Samarangana Sutradhara
समरांगण सूत्रधार
by King Bhoja of Dhara | ~~800 pages
Vishvakarmaprakasha
विश्वकर्मप्रकाश
by Attr. Vishvakarma | ~~400 pages
Kashyapa Shilpa Shastra
काश्यप शिल्प शास्त्र
by Sage Kashyapa | ~~300 pages
Aparajitaprccha
अपराजितपृच्छा
by Bhuvanadeva | ~~600 pages
Vastu Sastra Vol. I
वास्तु शास्त्र खंड I
by D.N. Shukla | ~827 pages
Manushyalaya Chandrika
मनुष्यालय चंद्रिका
by Kerala School | ~~200 pages
Silpa Prakasa
शिल्प प्रकाश
by Odisha School | ~~300 pages